8वें वेतन आयोग पर बड़ा फैसला: DA को बेसिक पे में मिलाने से केंद्र का इनकार, जानें अब क्या होगा

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि 8वें वेतन आयोग के तहत महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में मिलाने की मांग स्वीकार नहीं की जाएगी। यानी DA और महंगाई राहत (DR) मौजूदा फॉर्मूले के हिसाब से ही मिलता रहेगा, जब तक आयोग अपनी रिपोर्ट नहीं दे देता। कर्मचारी संगठन लंबे समय से DA के बेसिक पे में विलय की मांग कर रहे थे, क्योंकि DA 60 फीसदी के स्तर तक पहुंच चुका है।
सरकार के मुताबिक साल में दो बार होने वाला DA संशोधन महंगाई की भरपाई के लिए काफी है। साथ ही, DA का बेसिक पे में विलय पेंशन देनदारियों को स्थायी रूप से बढ़ा देगा — सरकार पर लंबे समय तक भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा। RBI के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में औसत महंगाई 5.4 फीसदी रही, जो लक्ष्य दायरे में ही है।
कर्मचारी संगठनों की दलील DA के आंकड़ों पर टिकी है। केंद्रीय कर्मचारी परिसंघ के मुताबिक DA जुलाई 2023 में 46 फीसदी था, जो जनवरी 2024 में 50, जुलाई 2024 में 53, जनवरी 2025 में 55, जुलाई 2025 में 58 और जनवरी 2026 में 60 फीसदी हो गया। ढाई साल में 14 फीसदी अंकों की यह बढ़त कर्मचारियों की घटती क्रय शक्ति को दर्शाती है — और यही 8वें वेतन आयोग से ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग का सबसे बड़ा आधार बन गई है।
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक है जिससे नई वेतन संरचना में बेसिक पे तय होता है — 7वें आयोग में यह 2.57 और 6वें में 1.86 था। इस बार मांगें ज्यादा हैं: नेशनल काउंसिल-JCM ने 3.833 फैक्टर और ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे, भारत पेंशनर समाज ने 3.83 और सर्वे ऑफ इंडिया संघ ने 3.61 का प्रस्ताव रखा है। ये सिर्फ मांगें हैं — अंतिम फैसला आयोग की सिफारिश पर होगा।
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को हुआ था और इसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आयोग को 18 महीने का कार्यकाल मिला है, यानी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक सरकार को सौंपनी है। आयोग देशभर में कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और संगठनों से परामर्श कर रहा है — 8 अक्टूबर को बेंगलुरु में बैठक हो चुकी है और 22-23 अक्टूबर को मुंबई में अगला दौर होगा। इससे पहले दिल्ली, पुडुचेरी, लद्दाख और उत्तर प्रदेश में भी सत्र हो चुके हैं।
टाइमलाइन को देखते हुए कर्मचारियों को धैर्य रखना होगा। रिपोर्ट आने के बाद भी सरकार की मंजूरी, कैबिनेट फैसला और कार्यान्वयन की प्रक्रिया में महीने लगेंगे — जानकारों का अनुमान है कि वेतन में असली बढ़ोतरी 2027 के आखिर या उसके बाद ही पेचेक में दिखेगी। तब तक साल में दो बार होने वाला DA संशोधन ही महंगाई से राहत का एकमात्र जरिया रहेगा।
सरकार के इस रुख से एक बात साफ हो गई है — 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें ही अगले एक दशक की वेतन-पेंशन संरचना तय करेंगी। आयोग वेतन समानता, पेंशन युक्तिकरण, प्रदर्शन-आधारित वेतन और 7वें आयोग से चली आ रही विसंगतियों जैसे मुद्दों पर विचार कर रहा है। कर्मचारी संगठनों के लिए अब सबसे अहम मंच आयोग की परामर्श बैठकें हैं, जहां वे अपनी मांगें तथ्यों के साथ रख सकते हैं।
कुल मिलाकर, DA विलय की मांग खारिज होने से कर्मचारियों को झटका जरूर लगा है, लेकिन खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। फिटमेंट फैक्टर, HRA, यात्रा भत्ता और चिकित्सा सुविधाओं पर आयोग क्या सिफारिश करता है — यही तय करेगा कि केंद्रीय कर्मचारियों की जेब में असल में कितनी बढ़ोतरी होगी। तब तक हर DA संशोधन पर नजर रखना ही समझदारी है।
- केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के तहत DA को बेसिक पे में मिलाने की मांग खारिज की
- सरकार का तर्क: साल में दो बार DA संशोधन महंगाई की भरपाई के लिए काफी; विलय से पेंशन देनदारी बढ़ेगी
- DA जुलाई 2023 में 46% से बढ़कर जनवरी 2026 में 60% हो चुका — कर्मचारी संगठनों की मुख्य दलील
- कर्मचारी संगठन 3.833 फिटमेंट फैक्टर और ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे की मांग कर रहे हैं
- आयोग की रिपोर्ट मई-जून 2027 तक आने की उम्मीद; असली वेतन बढ़ोतरी 2027 के अंत तक संभव
- मुंबई में 22-23 अक्टूबर को अगली परामर्श बैठक — कर्मचारी संगठन अपनी मांगें रखेंगे
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

