पंजाब-हरियाणा में बेमौसम बारिश बनी आफत: मंडियों में भीगा धान, किसानों ने नमी-छूट और मुआवजे की मांग उठाई

बारिश से भरी अनाज मंडी में भीगी धान की बोरियां ढकते किसान

धान की फसल मंडियों में पहुंच ही रही थी कि मौसम ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। 11 और 12 अक्टूबर को पंजाब और हरियाणा के कई हिस्सों में हुई बेमौसम बारिश ने खेतों और मंडियों में रखी धान की फसल को भिगो दिया। किसानों को डर है कि अगर गीली धान की फसल ज्यादा देर तक भीगी रही तो उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है, जिससे बेचने में दिक्कत आएगी।

सबसे गंभीर हालात पंजाब के सीमावर्ती जिले फाजिल्का में देखने को मिले, जहां की अनाज मंडी में दो से तीन फीट तक पानी भर गया और खुले में रखी धान की फसल पानी में डूब गई। कई जगहों पर धान के दाने पानी में बहते दिखाई दिए। किसानों का कहना है कि कुछ फसल की सरकारी खरीद हो चुकी थी, लेकिन तौल और उठान न होने की वजह से वह भी बारिश की चपेट में आ गई। किसानों, मजदूरों और आढ़तियों ने मुआवजे और पानी की तुरंत निकासी की मांग की है।

हरियाणा के अंबाला की अनाज मंडी में भी बारिश का पानी भर गया, जिससे खुले में रखी धान से भरी बोरियां भीग गईं। किसानों का आरोप है कि मंडी में पानी की निकासी ठीक से नहीं होने के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। मंडी बोर्ड के सहायक सचिव जसबीर के मुताबिक अंबाला मंडी में अब तक 4,14,368 क्विंटल धान पहुंच चुका है, जिसमें से करीब 3,43,972 क्विंटल की खरीद हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खरीदे गए धान में से लगभग 74 फीसदी का उठान भी किया जा चुका है।

एशिया की सबसे बड़ी अनाज मंडियों में गिनी जाने वाली पंजाब की खन्ना मंडी में भी बारिश ने कहर बरपाया। यहां खुले आसमान के नीचे रखी धान की बोरियां भीग गईं। किसानों का आरोप है कि फसल को बचाने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे और बारिश के दौरान कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, इसलिए किसानों ने खुद तिरपाल लगाकर धान ढकने की कोशिश की, जो लगातार तेज बारिश में नाकाफी साबित हुई।

मंडियों में धान बेचने पहुंचे कई किसानों ने खरीद में देरी का आरोप भी लगाया है। खन्ना मंडी में किसानों के मुताबिक बारिश के दौरान कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, इसलिए किसानों ने खुद तिरपाल की व्यवस्था करके धान ढकने की कोशिश की, लेकिन लगातार तेज बारिश में फसल को पूरी तरह बचाना मुश्किल हो गया। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि खरीद के दौरान प्रति क्विंटल तीन से पांच किलो तक धान की कटौती की जा रही है। किसानों की मांग है कि बारिश से प्रभावित धान की खरीद के लिए नमी की तय सीमा में छूट दी जाए और इसे 20 से 22 प्रतिशत तक किया जाए।

दूसरी ओर, हरियाणा सरकार का कहना है कि वह किसानों के साथ खड़ी है। करनाल में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि मौसम एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार किसानों के साथ है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को मंडियों का दौरा कर किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए कहा गया है। मंडी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पानी की निकासी के लिए कर्मचारी लगाए गए हैं और भीगे धान को सुखाकर उठान किया जाएगा।

खेतों में खड़ी फसल पर भी बारिश का असर पड़ा है, क्योंकि पंजाब-हरियाणा में धान की कटाई का सीजन चल रहा है। किसान संगठनों की मांग है कि नुकसान का सही आकलन हो और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा मिले। फिलहाल मंडियों में पानी की निकासी और भीगे धान को सुखाने की व्यवस्था ही सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है।

मुख्य बातें:
  • 11-12 अक्टूबर की बारिश से फाजिल्का, अंबाला, खन्ना और करनाल की मंडियों में धान भीगा
  • फाजिल्का मंडी में 2-3 फीट पानी भरा; खुली धान की फसल पानी में डूबी और बही
  • अंबाला मंडी में अब तक 4,14,368 क्विंटल धान पहुंचा, 3,43,972 क्विंटल की खरीद हुई
  • किसानों की मांग: धान में नमी की सीमा 20-22 प्रतिशत तक बढ़ाई जाए
  • कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा का दावा: सरकार किसानों के साथ, मंडी दौरों के आदेश

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।