ईडी ने रिलायंस पावर की 2,032 करोड़ की संपत्तियां जब्त कीं — FEMA उल्लंघन का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई — आधिकारिक दस्तावेज और जांच का प्रतीकात्मक चित्र

देश की बड़ी कंपनियों के खिलाफ जांच एजेंसियों की कार्रवाई का एक नया उदाहरण सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नई दिल्ली स्थित मुख्यालय जांच इकाई ने अनिल अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) की करीब 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली हैं। एजेंसी ने बुधवार, 14 अक्टूबर को जारी आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी।

यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत की गई है। जब्त संपत्तियों में कंपनी के बैंक बैलेंस और सासन पावर लिमिटेड में कंपनी की हिस्सेदारी शामिल है। ईडी के मुताबिक, इन संपत्तियों का मूल्य उस विदेशी मुद्रा के बराबर है जिसे कंपनी ने FEMA की धारा 4 का उल्लंघन करके भारत से बाहर रखा हुआ था। यह जब्ती FEMA, 1999 की धारा 37A के अंतर्गत की गई।

इस जांच की शुरुआत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली सूचना के आधार पर हुई थी। सेबी ने कंपनी की खाता पुस्तकों में दिखे 2,101.46 करोड़ रुपये के राइट-ऑफ और प्रावधानों की ओर ध्यान दिलाया था। जांच में सामने आया कि ये राइट-ऑफ विदेशी निवेश और उन कंपनियों को दिए गए अग्रिमों से जुड़े थे, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) और केमैन आइलैंड्स में पंजीकृत थीं।

इस मामले में 6 से 8 मार्च 2026 के बीच FEMA के तहत तलाशी अभियान चलाए गए थे। इन तलाशियों में एजेंसी को कई ऐसे दस्तावेज मिले जिन्हें जांच के लिए अहम माना गया, और कई लोगों के बयान भी दर्ज किए गए। इसके बाद महीनों तक चली जांच में लेन-देन का एक जटिल तानाबाना सामने आया।

ईडी के बयान के मुताबिक, असल कहानी 2006 से शुरू होती है। उस साल रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (RNRL) — जिसका बाद में रिलायंस पावर में विलय हो गया — ने 30 करोड़ डॉलर के विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ डॉलर का निवेश कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर सहायक कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड में किया गया।

आगे की जांच में पता चला कि सिंगापुर की इस कंपनी ने यह पैसा जेनेवा स्थित डॉयचे बैंक (सुइस) SA में जमा कर दिया। इसके बाद इन जमाओं को BVI में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए कर्जों के लिए गारंटी (कोलेटरल) के रूप में इस्तेमाल किया गया। ईडी का आरोप है कि BVI की ये कंपनियां असल में भारत से ही नियंत्रित और संचालित की जा रही थीं — रिलायंस अनिल अंबानी समूह के इशारों पर काम करने वाले फ्रंट व्यक्तियों के जरिए।

जांच में यह भी संकेत मिला है कि कर्ज की रकम के एक हिस्से को मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के जरिए अस्थायी तौर पर वापस भारत में रूट किया गया — यानी पैसे को घुमाकर देश में लाने का कथित प्रयास। ईडी ने यह भी आरोप लगाया है कि लेन-देन को छिपाने के लिए दस्तावेजों में पिछली तारीखों का इस्तेमाल किया गया।

इस मामले का निवेशकों और बाजार के लिए गहरा महत्व है। किसी सूचीबद्ध कंपनी की हजारों करोड़ की संपत्तियों की जब्ती उसके शेयरधारकों, कर्जदाताओं और कर्मचारियों — सभी को प्रभावित करती है। FEMA के तहत इस तरह की कार्रवाई विदेश में पैसे रखने के नियमों को लेकर सख्ती का संदेश भी देती है। अभी जांच जारी है और एजेंसी का कहना है कि दायरा आगे बढ़ सकता है।

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, इस चरण में जब्ती का मतलब अंतिम निष्कर्ष नहीं है। कंपनी और उसके प्रवर्तकों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा, और मामले की अंतिम दिशा अदालतों में तय होगी। फिर भी, विदेशी मुद्रा नियमों को लेकर यह कार्रवाई आने वाले समय में कई बड़ी कंपनियों के लिए चेतावनी की तरह देखी जा रही है।

मुख्य बातें:
  • ईडी ने रिलायंस पावर की 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्तियां FEMA की धारा 37A के तहत जब्त कीं — बैंक बैलेंस और सासन पावर की हिस्सेदारी शामिल
  • जांच सेबी की सूचना पर शुरू हुई — कंपनी की किताबों में 2,101.46 करोड़ के राइट-ऑफ से जुड़े विदेशी निवेश और BVI-केमैन कंपनियों को अग्रिम
  • कड़ी दर कड़ी: 2006 में 30 करोड़ डॉलर के बॉन्ड, 27.5 करोड़ डॉलर सिंगापुर सहायक में, फिर जेनेवा के डॉयचे बैंक में जमा — BVI कर्जों की गारंटी
  • ईडी का आरोप — BVI कंपनियां भारत से ही फ्रंट व्यक्तियों के जरिए नियंत्रित; मॉरीशस के रास्ते पैसे घुमाकर वापस लाने का कथित प्रयास
  • 6-8 मार्च 2026 को तलाशी में अहम दस्तावेज मिले; जांच जारी — निवेशकों, कर्जदाताओं और शेयरधारकों पर सीधा असर संभव
  • कानूनी प्रक्रिया अभी बाकी — कंपनी को पक्ष रखने का मौका मिलेगा, अंतिम फैसला अदालतों में तय होगा

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।