जुलाई 2026 का DA अभी भी अटका: दर 60% पर स्थिर, दिवाली के आसपास ऐलान की उम्मीद — 8वें वेतन आयोग की हलचल तेज

सरकारी कार्यालय के गलियारे में दस्तावेज लेकर कतार में खड़े कर्मचारी और पेंशनभोगी

केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 68 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को जुलाई 2026 से देय महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का इंतजार अभी भी है। 18 अक्टूबर तक इस किस्त पर कोई कैबिनेट आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए जनवरी 2026 से लागू 60% की दर ही फिलहाल प्रभावी बनी हुई है। त्योहारी सीजन के बीच यह देरी कर्मचारियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।

आखिरी बार महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी 18 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दर को मूल वेतन के 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया था। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हुई थी और इसका लाभ करीब 50.46 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 68.27 लाख पेंशनभोगियों को मिला था। सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार इस फैसले का राजकोष पर सालाना बोझ ₹6,791.24 करोड़ आंका गया था। इसके बाद व्यय विभाग ने 22 अप्रैल 2026 को क्रियान्वयन संबंधी कार्यालय ज्ञापन भी जारी किया था।

महंगाई भत्ते की समीक्षा साल में दो बार होती है — जनवरी और जुलाई से प्रभावी। जुलाई वाली किस्त का गणित जुलाई 2025 से जून 2026 तक के 12 महीनों के अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (औद्योगिक श्रमिक) के औसत पर आधारित होता है। इस अवधि के महंगाई आंकड़ों के हिसाब से करीब 3 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है, जिससे दर 63% तक पहुंच सकती है। हालांकि अंतिम प्रतिशत और भुगतान की तारीख की पुष्टि सिर्फ केंद्रीय मंत्रिमंडल की औपचारिक मंजूरी के बाद ही होगी।

पिछले साल के पैटर्न पर नजर डालें तो जुलाई 2025 की DA किस्त की घोषणा 1 अक्टूबर 2025 को हुई थी, जिसमें दर 55% से बढ़ाकर 58% की गई थी। वह बढ़ोतरी भी 1 जुलाई 2025 से पूर्व प्रभाव से लागू हुई थी। इसलिए इस बार भी कई मीडिया रिपोर्टों में दिवाली (20 अक्टूबर) के आसपास घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। एक रिपोर्ट में 21 अक्टूबर की संभावित बैठक का भी जिक्र है, लेकिन यह सब अभी अटकलें हैं — आधिकारिक आदेश के बिना कुछ भी पक्का नहीं माना जा सकता।

देरी को लेकर कर्मचारी संगठनों ने भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (AIDEF) ने 10 अक्टूबर को सरकार को औपचारिक पत्र लिखकर जल्द घोषणा की मांग की। महासंघ का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी लगातार दबाव में हैं। अगर दिवाली के आसपास मंजूरी मिलती है तो 1 जुलाई से बकाया एरियर भी एक साथ मिलेगा, जिससे त्योहारी खर्च में राहत मिलेगी।

इस बीच 8वें वेतन आयोग की गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। आयोग 22-23 अक्टूबर को मुंबई का दौरा कर कर्मचारी संघों, पेंशनर संगठनों और महासंघों से मुलाकात करेगा। कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में DA का मूल वेतन में विलय शामिल है — 7वें वेतन आयोग ने सिफारिश की थी कि DA 50% से ऊपर जाए तो उसे मूल वेतन में मिलाया जा सकता है, और मौजूदा दर 60% है। न्यूनतम मूल वेतन को लेकर NC-JCM ने ₹69,000 और महाराष्ट्र के एक पेंशनर संगठन ने ₹65,000 की मांग रखी है, जबकि फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग भी जोर पकड़ रही है।

यह समझना जरूरी है कि यह दर सिर्फ केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर लागू होती है। राज्य सरकारों के कर्मचारी, औद्योगिक महंगाई भत्ते वाले सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी और बैंक कर्मचारी (जिनका DA द्विपक्षीय समझौते से तय होता है) इसके दायरे में नहीं आते। फिलहाल सभी की निगाहें कैबिनेट के अगले फैसले पर टिकी हैं — घोषणा होते ही नई दर 1 जुलाई 2026 से पूर्व प्रभाव से लागू होगी और बीच के महीनों का एरियर भी मिलेगा।

मुख्य बातें:
  • जुलाई 2026 की DA किस्त पर अभी तक कोई कैबिनेट आदेश नहीं — दर 60% पर स्थिर
  • आखिरी बढ़ोतरी अप्रैल 2026 में: 58% से 60%, 50.46 लाख कर्मचारी और 68.27 लाख पेंशनर लाभान्वित
  • महंगाई के आंकड़ों से करीब 3 प्रतिशत अंक बढ़ोतरी का अनुमान — दर 63% तक जा सकती है
  • मीडिया रिपोर्टों में दिवाली के आसपास ऐलान की उम्मीद; औपचारिक पुष्टि सिर्फ कैबिनेट से होगी
  • AIDEF ने 10 अक्टूबर को सरकार को पत्र लिखकर जल्द ऐलान की मांग की
  • 8वां वेतन आयोग 22-23 अक्टूबर को मुंबई में कर्मचारी संगठनों से मिलेगा

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।