तमिलनाडु में ₹30 किलो मिलेगा बारीक चावल: इस वीकेंड से सहकारी दुकानों पर बिक्री, दाल-प्याज पर भी भाव कैप

तमिलनाडु में सहकारी राशन दुकान पर चावल खरीदती भीड़

चेन्नई: खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे तमिलनाडु के लोगों के लिए राहत भरी खबर आई है। राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने गुरुवार (15 अक्टूबर) को ऐलान किया कि सरकार बारीक किस्म का चावल सिर्फ ₹30 प्रति किलो की दर से बेचेगी। बिक्री इस वीकेंड से सहकारी दुकानों और राज्य सरकार के अमुधम रिटेल आउटलेट्स के जरिए शुरू होगी, और हर व्यक्ति को एक बार में अधिकतम 5 किलो चावल ही दिया जाएगा।

विभाग के मुताबिक पहले चरण में 25,000 टन बारीक चावल खरीदा जा रहा है। खाद्य मंत्री ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से कुल एक लाख टन खरीदा जाएगा और मांग बढ़ने पर आपूर्ति भी बढ़ेगी।

केवल चावल ही नहीं, रसोई के दूसरे सामान पर भी भाव कैप लगाया गया है। उबला पोननी चावल ₹60 प्रति किलो, तूर दाल ₹130, उड़द दाल ₹140, लहसुन ₹240, धनिया ₹240 और लाल मिर्च ₹330 प्रति किलो के भाव से बेची जाएगी। राशन दुकानों के जरिए प्याज ₹35 प्रति किलो पर मिलना जारी रहेगा। सरकार ने कहा कि पहले भी प्याज की कीमतें ₹65 पहुंचने पर इसी तरह 2,500 टन से ज्यादा प्याज ₹35 पर बेचा गया था, और जरूरत पड़ने पर ऐसे बाजार हस्तक्षेप आगे भी किए जाएंगे।

यह फैसला अचानक नहीं आया। पिछले कुछ महीनों में तमिलनाडु में चावल की खुदरा कीमतों में तेज उछाल आया है। मंत्री के बताए आंकड़ों के मुताबिक 2021 में जो चावल ₹47 किलो था, वह 2023 में ₹53, 2025 में ₹60 और अब ₹62 किलो पहुंच गया है। अगस्त 2026 में ₹50-60 किलो बिक रहा चावल अक्टूबर आते-आते ₹70-80 किलो पहुंच गया; मदुरै में बारीक चावल ₹90 किलो पार करने पर घबराहट में खरीददारी की खबरें भी आई थीं। तूर दाल भी 2021 के ₹111 से बढ़कर ₹171 किलो पहुंच चुकी है।

मंत्री वेंकटरमणन ने कीमत बढ़ने की वजह भी बताई: पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से चावल की आवक में मौसमी कमी आई, जिससे सप्लाई घटी और भाव चढ़े। उन्होंने दावा किया कि कीमत बढ़ाने में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों की जमाखोरी भी एक वजह है, और सरकार ने जमाखोरी व कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।

इस मसले पर सियासत भी गरमाई है। डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से कहा कि वे खुद किसी स्थानीय किराना दुकान पर जाकर उपभोक्ताओं का बोझ देखें। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि आलोचक अक्सर आधी-अधूरी जानकारी पर प्रतिक्रिया देते हैं, जबकि सरकार ने दो दिन पहले ही मूल्य निर्धारण व निगरानी समिति की बैठक करके हस्तक्षेप की ठोस योजना बनाई थी।

उपभोक्ताओं के लिए सवाल है कि यह सस्ता चावल कहां और कैसे मिलेगा। सहकारी दुकानें और अमुधम आउटलेट्स राज्य भर में फैले हैं, और 5 किलो की सीमा इसलिए है ताकि ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक राहत पहुंचे। सरकार ने यह भी साफ किया कि 500 टन तूर दाल नेफेड (NAFED) के जरिए खरीदी जा रही है, ताकि दाल के भाव ₹130 पर स्थिर रखे जा सकें। राज्य का दावा है कि उसके पास नौ लाख टन से ज्यादा चावल का भंडार है, जो सात करोड़ लोगों के लिए करीब तीन महीने की पीडीएस आपूर्ति के लिए पर्याप्त है।

कुल मिलाकर तमिलनाडु ने महंगाई से लड़ने के लिए सीधा बाजार में उतरने का रास्ता चुना है। ₹70-90 किलो बिक रहा बारीक चावल अगर ₹30 पर मिलता है, तो परिवारों के रसोई खर्च में सीधी राहत आएगी। अब नजर इस पर रहेगी कि आपूर्ति कितनी तेजी से दुकानों तक पहुंचती है और खुले बाजार के भाव कितना नीचे आते हैं।

मुख्य बातें:
  • बारीक किस्म का चावल ₹30 प्रति किलो — अमुधम और सहकारी दुकानों से बिक्री इस वीकेंड से
  • प्रति व्यक्ति 5 किलो की खरीद सीमा; पहले चरण में 25,000 टन, कुल 1 लाख टन खरीद की योजना
  • उबला पोननी चावल ₹60, तूर दाल ₹130, उड़द दाल ₹140 किलो; प्याज ₹35 किलो पर जारी
  • मंत्री: 2021 से चावल ₹47 से बढ़कर ₹62 किलो हुआ, इसलिए बाजार में दखल जरूरी
  • कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी; मांग बढ़ने पर आपूर्ति बढ़ाई जाएगी

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।