फरीदाबाद में होगा 7वां वर्ल्ड लैंडस्लाइड फोरम, 23 नवंबर से जुटेंगे दुनियाभर के विशेषज्ञ

भारत 23 से 27 नवंबर 2026 तक फरीदाबाद में 7वें वर्ल्ड लैंडस्लाइड फोरम (WLF7) की मेज़बानी करने जा रहा है। यह पहली बार है जब यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच भारत में आयोजित होगा — भारत ऐसा करने वाला पांचवां देश बनेगा। आयोजन स्थल दिल्ली-NCR के फरीदाबाद स्थित अमृता विश्व विद्यापीठम होगा।
वर्ल्ड लैंडस्लाइड फोरम हर तीन साल में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑन लैंडस्लाइड्स (ICL) के तत्वावधान में आयोजित होता है, जिसमें यूनेस्को समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठन जुड़े हैं। पहला फोरम 2008 में टोक्यो में हुआ था, इसके बाद रोम, बीजिंग, लुब्लियाना, क्योटो और फ्लोरेंस में आयोजन हो चुके हैं।
इस बार का विषय है — 'सुरक्षित और लचीले समुदायों के लिए भूस्खलन विज्ञान और व्यवहार'। फोरम में भूस्खलन की पूर्व चेतावनी प्रणाली, निगरानी तकनीक, जोखिम आकलन, शमन रणनीतियों और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव जैसे विषयों पर चर्चा होगी। 22 नवंबर को प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्विन और उपग्रह-आधारित निगरानी जैसी उभरती तकनीकों पर मंथन होगा।
भारत के लिए इस आयोजन का खास महत्व है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे हिमालयी राज्यों में हर मानसून में भूस्खलन की घटनाएं सामने आती हैं — सड़कें बंद होती हैं, गांव कट जाते हैं और जान-माल का नुकसान होता है। ऐसे में भूस्खलन विज्ञान पर दुनिया के अनुभवों को एक मंच पर लाना भारत की आपदा तैयारी के लिए अहम है।
फोरम में वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, नीति-निर्माताओं और आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों के जुटने की उम्मीद है। सहयोगी संगठनों में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और इसरो (ISRO) शामिल हैं। संचालन समिति में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्माला, इसरो अध्यक्ष वी. नारायणन और GSI निदेशक सैबल घोष जैसे नाम हैं।
WLF7 कई वैश्विक प्रतिबद्धताओं से जुड़ा है — क्योटो लैंडस्लाइड कमिटमेंट 2020, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, 2030 सतत विकास एजेंडा, पेरिस जलवायु समझौता और भारत सरकार का आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर 10-सूत्री एजेंडा।
फोरम में प्रस्तुत शोध पत्रों की समीक्षा के बाद उन्हें 'प्रोग्रेस इन लैंडस्लाइड रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी' नामक स्कोपस-अनुक्रमित ओपन एक्सेस पुस्तक श्रृंखला में प्रकाशित किया जाएगा। शोध पत्र जमा करने की अवधि जून 2025 से मार्च 2026 तक थी।
आयोजन के स्थायी प्रभाव की दिशा में यह फोरम भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों के लिए विज्ञान-नीति समन्वय को मज़बूत करने का मंच बनेगा — ताकि आने वाले वर्षों में मानसून की तबाही को कम किया जा सके।
- 23-27 नवंबर 2026, अमृता विश्व विद्यापीठम, फरीदाबाद — पहली बार भारत में आयोजन
- विषय: सुरक्षित और लचीले समुदायों के लिए भूस्खलन विज्ञान और व्यवहार
- ICL-यूनेस्को के तत्वावधान में हर 3 साल में; पहले टोक्यो, रोम, बीजिंग, क्योटो, फ्लोरेंस में
- GSI, NDMA, इसरो सहयोगी; 22 नवंबर को AI-सैटेलाइट तकनीक पर कार्यशालाएं
- शोध पत्र स्कोपस-अनुक्रमित श्रृंखला में प्रकाशित होंगे
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

