'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले अभिजीत दीपके हिरासत में: कनॉट प्लेस में धारा 163, सेंट्रल पार्क बंद

दिल्ली के कनॉट प्लेस के पास तिरंगा लिए प्रदर्शनकारी और पुलिस बैरिकेड

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शुक्रवार को प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले पुलिस अपने साथ ले गई। यह मार्च कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में आयोजित करने का आह्वान किया गया था।

इससे पहले 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की एक टीम — जिसमें लगभग 15 से 20 पुलिसकर्मी शामिल थे — दीपके के ठिकाने पर पहुंची थी। वह उस समय दिल्ली के झंडेवालान इलाके में ठहरे हुए थे। पुलिस ने उन्हें दिल्ली पुलिस अधिनियम, 1978 की धारा 29 के तहत नोटिस दिया और प्रस्तावित प्रदर्शन न करने की हिदायत दी।

पुलिस का कहना है कि कनॉट प्लेस क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। इलाके में निषेधाज्ञा होने के कारण बिना अनुमति सभा या मार्च आयोजित नहीं किया जा सकता। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) ने भी प्रशासनिक कारणों से 16 और 17 अक्टूबर के लिए सेंट्रल पार्क बंद कर दिया है।

हिरासत में लिए जाते समय दीपके ने सवाल उठाया — 'क्या तिरंगा लहराना अपराध है?' पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आपत्ति राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर नहीं है, बल्कि प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना आवश्यक अनुमति के भीड़ जुटाने और मार्च निकालने पर है। तिरंगा फहराने और सार्वजनिक स्थान पर जुलूस निकालने के कानूनी पहलुओं को अलग-अलग समझना जरूरी है।

CJP ने 16 अक्टूबर की शाम सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर शांतिपूर्ण मार्च करने का आह्वान किया था। कार्यक्रम को देखते हुए इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और पुलिस ने आयोजकों को नियमों का पालन करने की चेतावनी दी थी। दीपके का कहना रहा कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय ध्वज फहराना और अपनी मांगों को सामने रखना था।

यह कार्रवाई CJP से जुड़े पहले घटनाक्रमों की कड़ी है। इससे पहले 14 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया था। दीपके ने पहले ही आशंका जताई थी कि मार्च से पहले उन्हें भी हिरासत में लिया जा सकता है।

घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई है। भाजपा ने CJP के आंदोलन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के नेता बांग्लादेश जैसा आंदोलन चाहते हैं। वहीं दीपके के समर्थकों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा फहराने पर रोक लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

अब नजर इस पर है कि CJP आगे कौन सी रणनीति अपनाती है। क्या पार्टी अदालत का रुख करेगी या प्रदर्शन का कोई और रास्ता चुनेगी — यह आने वाले दिनों में साफ होगा। दीपके की हिरासत को लेकर बहस फिलहाल थमती नजर नहीं आ रही है।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह कार्रवाई सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई। अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र में धारा 163 लागू होने और मार्च के लिए अनुमति नहीं मिलने के कारण यात्रा आयोजित नहीं की जानी चाहिए थी। यदि इसके बावजूद मार्च निकाला जाता, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाता और पुलिस कानून के अनुसार कार्रवाई करती।

मुख्य बातें:
  • 16 अक्टूबर को प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले अभिजीत दीपके हिरासत में
  • पुलिस ने धारा 29 के तहत नोटिस दिया; कनॉट प्लेस में BNSS की धारा 163 लागू
  • NDMC ने 16-17 अक्टूबर के लिए सेंट्रल पार्क बंद किया
  • दीपके का सवाल — 'क्या तिरंगा लहराना अपराध है?'; पुलिस बोली — आपत्ति बिना अनुमति सभा पर
  • 14 अक्टूबर को CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका भी हिरासत में लिए गए थे
  • भाजपा ने आंदोलन पर निशाना साधा; समर्थकों ने लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।