गन्ना किसानों का आंदोलन तेज: महाराष्ट्र की 55 में से सिर्फ 15 चीनी मिलों में पेराई शुरू, चीनी के दाम पर क्या पड़ेगा असर?

महाराष्ट्र के गन्ने के खेत और दूर दिखती चीनी मिल

महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना किसानों के चल रहे आंदोलन का असर अब चीनी उद्योग पर साफ दिखने लगा है। गुरुवार तक के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र की 55 चीनी मिलों में से केवल 15 ने ही 2026-27 सीजन की गन्ने की पेराई शुरू की है, जबकि कर्नाटक में अब तक एक भी नियमित चीनी मिल का काम शुरू नहीं हुआ है। गन्ने का प्रमुख इलाका कहलाने वाले कोल्हापुर में गुरुवार को एक भी मिल शुरू नहीं हो पाई, हालांकि 15 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की उम्मीद थी।

किसान गन्ने के लिए बेहतर लाभकारी मूल्य और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) को बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलो करने की मांग पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत के मुकाबले उन्हें मिलने वाला दाम बहुत कम है। इसी मांग को लेकर मंगलवार से महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा पर विरोध प्रदर्शन चल रहा है, जिससे व्यस्त मुंबई-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी बाधित हुई थी।

कोल्हापुर से सटे सांगली जिले में भी कोई चीनी मिल शुरू नहीं हो पाई है। सूत्रों के अनुसार किसान नेता राजू शेट्टी के नेतृत्व में कई कार्यकर्ता मिलों के बाहर धरने पर बैठे हैं। कोल्हापुर गन्ने की प्रमुख बेल्ट है, जहां हजारों किसान गन्ने की खेती पर ही निर्भर हैं। मिलों के न खुलने से किसानों की फसल खेतों में खड़ी है और उन्हें भुगतान में देरी की चिंता सता रही है।

इस गतिरोध को तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने बुधवार को एक समिति बनाने का ऐलान किया था। भारत सरकार ने 14 अक्टूबर को जारी जानकारी में बताया कि यह समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग, चीनी की बिक्री कीमत, मिलों में गन्ने की तुलाई और शुगर रिकवरी की जांच जैसे मुद्दों पर विचार करेगी। समिति की अध्यक्षता नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद करेंगे।

यह समिति केंद्रीय कृषि मंत्री और केंद्रीय खाद्य मंत्री के साथ महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर बनाई गई है। जब किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम करने की धमकी दी थी, तब केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रमुख किसान संगठनों से बातचीत की थी।

हालांकि किसान संगठनों ने समिति के गठन को खारिज कर दिया है और अपना आंदोलन जारी रखा है। सूत्रों के अनुसार किसानों की नाराजगी की वजह यह है कि समिति की रिपोर्ट सौंपने या सिफारिशों को लागू करने की कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं की गई है। किसानों का कहना है कि उन्हें लगता है कि उनकी मांगें तुरंत पूरी नहीं होंगी।

सरकार ने समिति के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र में 40 मिलों ने अक्टूबर में पेराई सीजन शुरू होने से पहले की जाने वाली पारंपरिक पूजा तो कर ली है, लेकिन आंदोलन के कारण पूरी तरह कामकाज शुरू नहीं हो पाया। जिन 15 मिलों ने 8 अक्टूबर से काम शुरू किया है, उनमें बनने वाली चीनी से कीमतों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक देश के क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य हैं, इसलिए यहां का गतिरोध पूरे देश के चीनी बाजार को प्रभावित कर सकता है। अगर आंदोलन लंबा खिंचा तो चीनी की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार और किसान संगठनों के बीच अगली बातचीत पर टिकी हैं।

मुख्य बातें:
  • महाराष्ट्र की 55 में से सिर्फ 15 चीनी मिलों ने 2026-27 सीजन की पेराई शुरू की है।
  • कर्नाटक में अब तक एक भी नियमित चीनी मिल चालू नहीं हुई है।
  • किसानों की मांग: गन्ने का बेहतर दाम और चीनी का MSP 60 रुपये प्रति किलो।
  • केंद्र ने प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति बनाई, किसानों ने खारिज किया।
  • 15 अक्टूबर को कोल्हापुर में एक भी मिल शुरू नहीं हो पाई।

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।