हरियाणा के सीएम का दावा: 'बीज से बाज़ार तक किसानों के साथ, फसल का हर दाना MSP पर खरीदते हैं'

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार, 17 अक्टूबर को किसानों के साथ खड़े होने का बड़ा संदेश दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हिंदी में पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा — 'बीज से बाज़ार तक अन्नदाताओं के साथ खड़े हैं' — और दावा किया कि हरियाणा देश का पहला राज्य है जो फसल का हर दाना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदता है।
एमएसपी वह सरकारी गारंटी वाला न्यूनतम दाम है, जिस पर राज्य एजेंसियां और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) किसानों से अधिसूचित फसलें सीधे खरीदते हैं। हरियाणा हरित क्रांति के दौर से देश के प्रमुख अन्न भंडारों में रहा है और पंजाब के साथ मिलकर केंद्र के खाद्यान्न पूल में बड़ा हिस्सा देता है — यही कारण है कि यहां की खरीद व्यवस्था का असर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर भी पड़ता है।
इसी दिन हरियाणा के सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने रोहतक की अनाज मंडी का दौरा कर खरीद इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं खरीद व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं और अधिकारियों को निर्देश हैं कि किसानों को फसल बेचने में कोई दिक्कत न हो। शर्मा ने कहा कि खरीद, मंडियों से उठान और किसानों को भुगतान — तीनों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
शर्मा ने पिछली सरकार से तुलना करते हुए दावा किया कि पहले किसानों को फसल बेचने के लिए मंडियों में दो-तीन महीने इंतजार करना पड़ता था, जबकि अब खरीद प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी हो जाती है। उन्होंने खरीद प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त न करने की बात कही। हालांकि यह तुलना उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है, जिस पर विपक्ष की प्रतिक्रिया भी आई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने 16 अक्टूबर को ही पुष्टि की थी कि राज्य में खरीफ सीजन की धान खरीद एमएसपी पर पूरी रफ्तार से चल रही है। खरीफ 2026-27 के लिए धान का एमएसपी सामान्य श्रेणी में 2,441 रुपये और ग्रेड-ए में 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय है — पिछले साल से 72 रुपये अधिक। किसानों को सलाह दी गई है कि मंडी में 17 प्रतिशत नमी मानक वाली फसल ही लाएं।
दो साल की सरकार की उपलब्धियों पर सैनी ने बताया कि राज्य सभी 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद कर रहा है। 2024 के खरीफ में देरी से बारिश से प्रभावित किसानों को 2,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से 1,345 करोड़ रुपये का बोनस दिया गया, पिछले दो वर्षों में किसानों के खातों में सीधे 7,882 करोड़ रुपये हस्तांतरित हुए, और बाजरा के भावांतर भरपाई योजना के तहत 1.56 लाख किसानों को 360 करोड़ रुपये मिले।
दूसरी ओर किसान संगठनों की शिकायतें भी सामने आई हैं। भारतीय किसान यूनियन ने आरोप लगाया था कि हरियाणा की मंडियों में धान और बाजरा निर्धारित एमएसपी से कम दाम पर बिक रहा है, जिस पर 14 अक्टूबर को राज्यव्यापी विरोध भी हुआ था। नेताओं का कहना है कि एमएसपी की घोषणा का मतलब तभी है जब किसान को तय दाम सच में मिले। सरकार का कहना है कि निगरानी बढ़ाकर इन खामियों को दूर किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 'हर दाने की एमएसपी पर खरीद में पहला राज्य' का दावा मुख्यमंत्री का बयान है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिकॉर्ड से नहीं हो पाई है — हालांकि हरियाणा दशकों से बड़े पैमाने पर खरीद करता आ रहा है। किसान अब रबी सीजन की ओर देख रहे हैं, जहां गेहूं की बुवाई के बाद खरीद व्यवस्था एक बार फिर कसौटी पर होगी।
- सीएम सैनी का दावा: 'बीज से बाज़ार तक किसानों के साथ'; हर दाना एमएसपी पर खरीदने वाला पहला राज्य
- सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा ने 17 अक्टूबर को रोहतक मंडी का दौरा किया; खरीद-उठान-भुगतान की निगरानी
- खरीफ 2026-27 धान एमएसपी: सामान्य 2,441 रुपये, ग्रेड-ए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल (72 रुपये बढ़ोतरी)
- सभी 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद; दो साल में किसानों के खातों में 7,882 करोड़ सीधे हस्तांतरित
- बाजरा भावांतर भरपाई: 1.56 लाख किसानों को 360 करोड़; नकली बीज-खाद पर 5 साल की सजा का कानून
- किसान संगठनों का आरोप: कुछ मंडियों में एमएसपी से कम बिक्री; सरकार बोली निगरानी बढ़ेगी
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

