भारत के रामसर स्थल 103 हुए: सुखना वेटलैंड और सौज झील अंतरराष्ट्रीय सूची में शामिल

सूर्योदय पर आर्द्रभूमि के ऊपर उड़ते प्रवासी पक्षी और सारस क्रेन

भारत की रामसर स्थलों की सूची एक और ऐतिहासिक मील के पत्थर पर पहुंच गई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर को घोषणा की कि चंडीगढ़ का सुखना वेटलैंड और उत्तर प्रदेश की सौज झील रामसर सूची में शामिल कर लिए गए हैं। इन दो नए नामों के साथ भारत के अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि स्थलों की संख्या 103 हो गई है।

सुखना वेटलैंड चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल बना है। यह शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित एक अर्ध-शहरी जलाशय है, जिसे 1958 में मौसमी सुखना चोए नाले पर बांध बनाकर तैयार किया गया था। 1988 में इसे राष्ट्रीय आर्द्रभूमि का दर्जा मिला था। यह करीब 3 वर्ग किलोमीटर में फैला है और खुले पानी, दलदल, झाड़ी और जंगल के मिले-जुले आवास प्रदान करता है।

सुखना मध्य एशियाई प्रवासी मार्ग पर आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण शरणस्थल है। यहां संकटग्रस्त कॉमन पोचार्ड, लुप्तप्राय पलास फिश ईगल और काली तालाब कछुए जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं। इसके साथ ही यह चंडीगढ़ के शहरी परिदृश्य के बीच लोगों के लिए मनोरंजन और पर्यावरण शिक्षा का भी अहम स्रोत है।

दूसरा नया स्थल सौज झील उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित है — गंगा नदी के बाढ़ मैदान में फैली एक उथली झील, जिसके चारों ओर खेत हैं। यह सामन पक्षी अभयारण्य के करीब है और रामसर सूची में मैनपुरी का दूसरा नाम है — पूरे उत्तर प्रदेश में मैनपुरी इकलौता ऐसा जिला है जिसके दो रामसर स्थल हैं।

सौज झील को बर्डलाइफ इंटरनेशनल ने महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता क्षेत्र घोषित किया है, जहां नियमित रूप से 30 हजार से अधिक जलपक्षी दर्ज किए जाते हैं। यहां सारस क्रेन और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल जैसे पक्षी तथा कमल और कांस घास जैसी वनस्पति पाई जाती है, जो घोंसले और भोजन के लिए आश्रय देती है।

रामसर कन्वेंशन आर्द्रभूमियों के संरक्षण और बुद्धिमत्तापूर्ण उपयोग के लिए 1971 में ईरान के रामसर शहर में अपनाई गई एक अंतरराष्ट्रीय संधि है, जो 1975 में लागू हुई। भारत 1982 से इसका सदस्य है। इस संधि के तहत घोषित स्थल 'अंतरराष्ट्रीय महत्व के आर्द्रभूमि' की सूची में शामिल होते हैं।

103 स्थलों के साथ भारत दक्षिण एशिया में सबसे आगे और एशिया में दूसरे स्थान पर बना हुआ है। मंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आर्द्रभूमियों के संरक्षण पर खास ध्यान दे रही है, क्योंकि ये जैव विविधता, जल और जलवायु सुरक्षा तथा स्थानीय आजीविका — तीनों के लिए बेहद अहम हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक रामसर का दर्जा इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक निगरानी और तकनीकी सहायता दिलाएगा, जिससे आवास संरक्षण मजबूत होगा और पर्यावरण शिक्षा व नियंत्रित पारिस्थितिक पर्यटन के रास्ते भी खुलेंगे। परीक्षा की दृष्टि से भी यह खबर अहम है — सुखना का रामसर स्थल नंबर 2602 और सौज झील का 2603 है।

मुख्य बातें:
  • सुखना वेटलैंड (चंडीगढ़) और सौज झील (मैनपुरी, उत्तर प्रदेश) रामसर सूची में शामिल
  • भारत के रामसर स्थलों की संख्या 103 हुई; दक्षिण एशिया में सबसे अधिक, एशिया में दूसरा स्थान
  • सुखना चंडीगढ़ का पहला रामसर स्थल — शिवालिक तलहटी में 1958 में बना जलाशय
  • सौज झील में 30 हजार से अधिक जलपक्षी; सारस क्रेन का घर; मैनपुरी का दूसरा रामसर स्थल
  • रामसर संधि 1971 में ईरान में अपनाई गई, 1975 में लागू; भारत 1982 से सदस्य
  • केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने 15 अक्टूबर को की घोषणा

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।