प्रियागोल्ड बिस्किट में पशु-चारे वाली भूसी: एफएसएसएआई ने शुरू की मुकदमे की कार्यवाही

किराने की दुकान की अलमारी में बिस्किट के पैकेटों पर खाद्य सुरक्षा जांच का प्रतीकात्मक दृश्य

देश के खाद्य सुरक्षा नियामक ने खाने-पीने के सामान को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने शनिवार को घोषणा की कि वह प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली कंपनी सूर्या फूड एंड एग्रो लिमिटेड के खिलाफ अभियोजन की कार्यवाही शुरू कर रहा है। आरोप है कि कंपनी बिस्किट बनाने में पशुओं के चारे के लिए चिह्नित भूसी को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल कर रही थी।

उपभोक्ता की शिकायत के बाद अधिकारियों ने कंपनी के परिसर का दौरा किया तो गंभीर खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता खामियां मिलीं। जांच में पाया गया कि जिन बोरों में भूसी रखी थी, उन पर साफ लिखा था कि यह पशुओं के चारे के लिए है, मानव उपभोग के लिए नहीं। कंपनी इसी भूसी को बिस्किट में फाइबर के स्रोत के रूप में मिला रही थी।

भूसी के मामले के अलावा निरीक्षण में और भी कई कमियां सामने आईं। नियामक के मुताबिक कारखाने की स्वच्छता, कीट नियंत्रण, कच्चे माल के भंडारण और अलग रखने की व्यवस्था, कर्मचारियों की स्वच्छता, परिसर के रखरखाव और तैयारी वाली वस्तुओं के प्रबंधन में भी नियमों का उल्लंघन पाया गया। इतनी व्यापक खामियों के बाद एफएसएसएआई ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया और सक्षम प्राधिकारी ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी।

एफएसएसएआई ने इसी कड़ी में दो और कंपनियों के खिलाफ भी अभियोजन की कार्यवाही शुरू की है। डोडला डेयरी लिमिटेड के फुल क्रीम दूध का नमूना मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया, क्योंकि उसमें दूध की वसा निर्धारित सीमा से कम थी। जांच प्रयोगशाला ने नमूने में हानिकारक पदार्थ और मानक से कम वसा की पुष्टि की। वहीं, उइर ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड की पीली किशमिश में कीटनाशक अवशेष पाए गए।

नियामक ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि इन तीनों कंपनियों के खिलाफ गंभीर खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के लिए कानूनी कार्यवाही शुरू की जा रही है। इसके अलावा नरपधाम फूड्स, सन रिजेज हेल्थ केयरर्स और शा कांतिलाल जयंतिलाल को भी नोटिस जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई सिर्फ चेतावनी या जुर्माने तक सीमित नहीं है; अभियोजन की मंजूरी का मतलब है कि मामला अब कानूनी प्रक्रिया के रास्ते पर बढ़ेगा।

प्रियागोल्ड जैसे जाने-माने ब्रांड का नाम सामने आने से यह मुद्दा आम उपभोक्ताओं के लिए खास अहम है। बिस्किट, दूध और किशमिश जैसे सामान हर घर की रसोई तक पहुंचते हैं; इनमें गलत कच्चा माल सीधे परिवारों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पशु-चारे के संदूषक खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

विशेषज्ञ उपभोक्ताओं को सलाह देते हैं कि पैकेटबंद सामान खरीदते समय पैकेट पर एफएसएसएआई का लाइसेंस नंबर, बैच नंबर, पैकिंग तारीख और एक्सपायरी तारीख जरूर जांचें। किसी सामान का रंग, गंध या स्वाद असामान्य लगे तो उसे इस्तेमाल न करें। साथ ही, खरीदारी का बिल हमेशा रखें, क्योंकि शिकायत दर्ज कराते समय यह सबूत का काम करता है।

अगर आपको किसी खाने-पीने की चीज की गुणवत्ता पर शक हो, तो एफएसएसएआई के ऑनलाइन शिकायत तंत्र में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। इसी तरह की शिकायत ने इस मामले में कार्रवाई की शुरुआत की थी। उपभोक्ताओं की सतर्कता ही खाद्य सुरक्षा तंत्र को मजबूत करती है — नियम बनाने के साथ-साथ उन्हें अमल में लाना भी जरूरी है, और यह काम सिर्फ नियामक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।

यह घटना महाराष्ट्र में खुले मसालों की बिक्री पर प्रतिबंध के तुरंत बाद आई है, जिससे साफ है कि खाद्य सुरक्षा एजेंसियां मिलावट के खिलाफ सख्त रुख अपना रही हैं। उपभोक्ता के तौर पर सबसे बड़ी सुरक्षा सतर्कता ही है — लेबल पढ़ें, बिल रखें और गड़बड़ी दिखे तो शिकायत दर्ज कराएं।

मुख्य बातें:
  • उपभोक्ता की शिकायत पर निरीक्षण में गंभीर खामियां; बिस्किट में पशु-चारे वाली भूसी का इस्तेमाल पाया गया।
  • एफएसएसएआई ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित किया; सक्षम प्राधिकारी ने अभियोजन की मंजूरी दी।
  • डोडला डेयरी के फुल क्रीम दूध का नमूना भी मानकों से नीचे; उइर ऑर्गेनिक के किशमिश में कीटनाशक अवशेष।
  • तीनों कंपनियों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत मुकदमा चलाने की तैयारी।
  • उपभोक्ताओं को सलाह: पैकेट पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और एक्सपायरी तारीख जरूर जांचें।
  • खराबी दिखे तो एफएसएसएआई के शिकायत तंत्र में दर्ज शिकायत ही कार्रवाई की पहली कड़ी।

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।