33 साल बाद महाराष्ट्र में फिर होंगे कॉलेज चुनाव: जनवरी 2027 का ऐलान

विश्वविद्यालय परिसर में मतदान केंद्र पर वोट डालते कॉलेज के छात्र

15 अक्टूबर को महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ी घोषणा की है। राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध कॉलेजों में जनवरी 2027 में छात्र परिषद के चुनाव कराए जाएंगे। यह घोषणा इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि महाराष्ट्र में कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर छात्र चुनाव करीब 33 साल से बंद हैं।

छात्र चुनावों पर प्रतिबंध की जड़ 1990 के दशक की कैंपस हिंसा में है। 1989 में मुंबई के एक कॉलेज के बाहर एक छात्र नेता की हत्या के बाद परिसरों में हिंसा का माहौल बन गया था। इसके बाद 1993 में छात्र चुनावों पर रोक लगा दी गई और 1994 के महाराष्ट्र विश्वविद्यालय अधिनियम में यह प्रतिबंध औपचारिक रूप से दर्ज हो गया। तब से छात्र प्रतिनिधियों का चयन शिक्षकों और प्राचार्यों द्वारा नामांकन के जरिए होता रहा है।

2016 में महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम के जरिए चुनावों का प्रावधान तो लाया गया था, लेकिन छात्र संगठनों की लंबे समय से चल रही मांग के बावजूद चुनाव अमल में नहीं आए। कुछ हफ्ते पहले राज्य सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए 12 सदस्यीय समिति बनाई थी, जो निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों के लिए दिशा-निर्देश तैयार कर रही है।

ताजा घोषणा के मुताबिक चुनावों के लिए महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य साफ है — चुनाव ऐसे कराए जाएं जिनमें राजनीतिक दलों की सीधी दखलंदाजी न हो और परिसरों में शांति बनी रहे। यह वह बिंदु है जिस पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी, क्योंकि छात्र संगठन आमतौर पर राजनीतिक दलों के छात्र विंग से जुड़े होते हैं।

छात्रों के लिए इस फैसले के सीधे मायने हैं। फीस, छात्रवृत्ति, उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन, छात्रावास और कैंपस की सुविधाएं जैसे मुद्दों पर अब चुने हुए प्रतिनिधि उनकी आवाज उठा सकेंगे। छात्र संगठनों ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि कुछ शिक्षाविदों को चिंता है कि चुनावों के साथ कैंपस राजनीति का कड़वा और हिंसक दौर भी लौट सकता है।

छात्र चुनावों की घोषणा के साथ ही राज्य सरकार ने शिक्षा से जुड़े कुछ और फैसले भी लिए हैं। 14 अक्टूबर को मंत्री दादा भुसे ने घोषणा की कि राज्य के सभी स्कूलों में स्काउट-गाइड प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाएगा, ताकि बच्चों में अनुशासन और नागरिक मूल्य विकसित हों। इसके अलावा सूखा प्रभावित इलाकों के छात्रों की परीक्षा फीस माफ करने का फैसला भी हुआ है।

साथ ही बंद पड़ी जल योजनाओं को 15 दिन के भीतर फिर से शुरू करने की योजना बनाई गई है, ताकि सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति बहाल हो सके। ये फैसले बताते हैं कि सरकार एक साथ शिक्षा, छात्र कल्याण और बुनियादी सुविधाओं पर काम कर रही है।

आने वाले महीनों में चुनाव से जुड़े नियम और कार्यक्रम घोषित होने की उम्मीद है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को उसके बाद तैयारियां शुरू करनी होंगी। तीन दशक से ज्यादा समय बाद हो रहे ये चुनाव महाराष्ट्र के लाखों छात्रों के लिए परिसर में लोकतंत्र की वापसी का मौका होंगे — बशर्ते वे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।

मुख्य बातें:
  • जनवरी 2027 में महाराष्ट्र के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्र परिषद चुनाव
  • 33 साल का अंतराल: 1993 में कैंपस हिंसा के बाद छात्र चुनावों पर लगा था प्रतिबंध
  • 1989 में मुंबई के एक कॉलेज के बाहर छात्र नेता की हत्या के बाद बदला था माहौल
  • लक्ष्य: राजनीतिक दलों की सीधी दखलंदाजी के बिना शांतिपूर्ण और पारदर्शी चुनाव
  • चुनाव के नियम बनाने के लिए 12 सदस्यीय समिति पहले से काम कर रही है
  • स्कूलों में स्काउट-गाइड अनिवार्य, सूखा प्रभावित छात्रों की परीक्षा फीस माफी जैसे फैसले भी साथ

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।