नेशनल हेराल्ड केस: ईडी के सामने तीन दिन पेश हुए राहुल गांधी, दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई — जानें पूरा मामला

देश की सबसे चर्चित राजनीतिक-कानूनी लड़ाइयों में से एक नेशनल हेराल्ड केस ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरीं हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दिल्ली मुख्यालय में तीन दिन तक लगातार पूछताछ के लिए पेश हुए। तीन सदस्यीय टीम ने उनका बयान दर्ज किया, और तीनों दिन की यह प्रक्रिया देर रात तक चली।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पहले दो दिनों में ही उनसे करीब 18 घंटे तक सवाल-जवाब हुए। तीसरे दिन भी वह एजेंसी के दफ्तर पहुंचे, जहां उनसे यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के वित्तीय लेन-देन और कंपनी के कामकाज को लेकर विस्तृत सवाल पूछे गए। यह पूछताछ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से जुड़ी एजेंसी की जांच का हिस्सा है।
पूछताछ के दौरान सूत्रों के हवाले से जो बातें सामने आईं, उनमें राहुल गांधी ने एजेंसी को यह भरोसा दिलाया कि यंग इंडियन से किसी ने एक पैसा भी बाहर नहीं निकाला है। उनका दावा था कि यह कंपनी कंपनी कानून के एक विशेष प्रावधान के तहत बनी गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका मकसद परोपकारी काम करना है, और इसने अपने उद्देश्य से बाहर जाकर कोई आर्थिक फायदा नहीं उठाया।
लेकिन ईडी के अधिकारियों ने इस दावे को मानने से इनकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों का तर्क था कि कंपनी ने अपनी स्थापना 2010 के बाद से अब तक कोई वास्तविक परोपकारी कार्य नहीं किया। अधिकारियों ने उनसे कहा कि अगर ऐसा कोई कार्य हुआ है, तो उसके दस्तावेजी सबूत या रिकॉर्ड पेश किए जाएं, ताकि दावे की पुष्टि हो सके।
यह मामला सिर्फ पूछताछ तक सीमित नहीं है। 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में ईडी की एक अहम याचिका पर सुनवाई भी हुई। एजेंसी ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया था कि मनी लॉन्ड्रिंग का यह मामला कानूनी रूप से टिक नहीं सकता, क्योंकि इसकी बुनियाद पुलिस की एफआईआर नहीं, बल्कि एक निजी शिकायत है।
गांधी परिवार की ओर से अदालत में दलील दी गई है कि यह ईडी की जांच का असाधारण उदाहरण है — पहली बार कोई मनी लॉन्ड्रिंग जांच महज एक निजी शिकायत के आधार पर शुरू की गई। उनका तर्क है कि ऐसा करना कानून, एजेंसी के अपने पुराने रुख और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मानकों के खिलाफ है। निचली अदालत ने भी मूल शिकायत और एजेंसी के मामले दर्ज करने के बीच लंबे अंतराल पर सवाल उठाए थे।
दूसरी ओर ईडी का कहना है कि आपराधिक कार्यवाही मजिस्ट्रेट के सामने निजी शिकायत से भी शुरू हो सकती है, और निचली अदालत की व्याख्या धन-शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के दायरे को सीमित कर देगी। हाईकोर्ट की सुनवाई का केंद्र बिंदु यही है कि एजेंसी की अपील कानूनी रूप से स्वीकार्य है या नहीं — इस पर जो फैसला आएगा, वह भविष्य में ऐसे सभी मामलों के लिए एक बड़ी नजीर बन सकता है।
विवाद की जड़ें यंग इंडियन और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के रिश्ते में हैं। एसोसिएटेड जर्नल्स नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करती थी, और यंग इंडियन ने इसका अधिग्रहण किया था। आरोप है कि इस अधिग्रहण में पार्टी के धन से सैकड़ों करोड़ की संपत्तियों का दुरुपयोग हुआ, जबकि कांग्रेस का जवाब है कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध के तहत हो रही है। अब सबकी निगाहें अदालत की अगली सुनवाई और जांच के अगले कदम पर टिकी हैं।
- ईडी दफ्तर में तीन दिन की पूछताछ; सूत्रों के मुताबिक पहले दो दिनों में ही करीब 18 घंटे के सवाल-जवाब हुए।
- राहुल गांधी ने एजेंसी को भरोसा दिया — यंग इंडियन एक गैर-लाभकारी संगठन है और इससे एक पैसा भी नहीं निकाला गया।
- ईडी अधिकारियों ने दावा खारिज किया, 2010 से स्थापना के बाद परोपकारी काम का सबूत मांगा।
- 12 अक्टूबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट में एजेंसी की याचिका पर अहम सुनवाई — मनी लॉन्ड्रिंग केस की कानूनी जड़ें ही सवालों के घेरे में।
- मामले की जड़ में निजी शिकायत पर शुरू हुई ईडी जांच — बिना पुलिस FIR के केस चल सकता है या नहीं, इसी पर बहस।
- कांग्रेस इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' बता रही है, जबकि एजेंसी वित्तीय अनियमितता के आरोपों पर जांच की बात कह रही है।
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

