पेपर लीक का इलाज: नीलकेनि बोले — परीक्षा के दिन ही बनेगा प्रश्नपत्र, सभी परीक्षाएं होंगी कंप्यूटर पर

देश की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की आहट है। केंद्र सरकार की परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के प्रमुख और इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलकेनि ने पेपर लीक रोकने का एक क्रांतिकारी फॉर्मूला सुझाया है — प्रश्नपत्र पहले से बनाया ही न जाए, बल्कि परीक्षा के दिन विशाल प्रश्न बैंक से आखिरी वक्त में तैयार किया जाए। नीलकेनि ने 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह प्रस्ताव रखा।
उनका तर्क बेहद सीधा है। नीलकेनि के मुताबिक, जैसे ही कोई तयशुदा प्रश्नपत्र अस्तित्व में आता है, उसे चोरी करके बेचने का आर्थिक लालच पैदा हो जाता है। लेकिन अगर लाखों सवालों के विशाल बैंक से परीक्षा के दिन ही — संभवतः आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से — पेपर तैयार हो, तो लीक करने के लिए कोई तय चीज ही नहीं बचेगी। 'पेपर' नाम की चीज का ही खात्मा हो जाएगा, तो उसे बेचने का धंधा भी खत्म हो जाएगा।
प्रस्ताव का दूसरा हिस्सा सभी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित (CBT) बनाना है। देश में फिलहाल करीब 1,50,000 परीक्षा केंद्र हैं, लेकिन नेटवर्क बढ़ाना होगा। CBT में पेपर छपने-पहुंचने की पूरी श्रृंखला ही खत्म हो जाती है — जो लीक का सबसे बड़ा रास्ता है।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब NEET-UG 2026 के पेपर लीक विवाद ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों का भरोसा हिला दिया था, जिसके बाद परीक्षा दोबारा करानी पड़ी थी। इसी पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को परीक्षा सुधारों के लिए उच्चाधिकार प्राप्त टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की थी। टास्क फोर्स को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) सहित सभी सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, सुरक्षा, डिजाइन और प्रबंधन में व्यापक सुधार सुझाने का जिम्मा मिला है।
टास्क फोर्स का दायरा सिर्फ पेपर सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसके अधिदेश में उपयुक्त तकनीक का इस्तेमाल, परीक्षा बुनियादी ढांचे का विस्तार, पहुंच और समावेशन में सुधार, और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा जैसे विषय भी शामिल हैं। घोषित उद्देश्य एक सुरक्षित, पारदर्शी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए तैयार परीक्षा प्रणाली बनाना है। टास्क फोर्स ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षण संस्थानों, विषय विशेषज्ञों और परीक्षा एजेंसियों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।
नीलकेनि ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री इन सिफारिशों को लागू करने के लिए बेहद इच्छुक हैं। हालांकि यह समझना जरूरी है कि ये अभी प्रस्ताव हैं — इन्हें जमीन पर उतारने के लिए मजबूत प्रश्न बैंक, सुरक्षित डिजिटल सिस्टम, पर्याप्त परीक्षा केंद्र और संचालन पायलट जैसे कई चरण पूरे करने होंगे। AI से पेपर बनाने पर सवालों की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम संतुलन और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल पहुंच जैसे मुद्दे भी उठेंगे, जिनका समाधान टास्क फोर्स को सुझाना होगा।
छात्रों के नजरिए से देखें तो यह प्रस्ताव दोधारी तलवार जैसा है। एक तरफ पेपर लीक का खात्मा मेहनती छात्रों के लिए सबसे बड़ी राहत होगी — अब तक लीक की खबरें ईमानदार अभ्यर्थियों के सालों की मेहनत पर पानी फेर देती थीं। दूसरी तरफ, आखिरी वक्त पर बनने वाले पेपर के लिए तैयारी का तरीका भी बदलना होगा — रटने के बजाय अवधारणाओं की गहरी समझ ज्यादा काम आएगी, क्योंकि प्रश्न बैंक से कोई भी सवाल आ सकता है।
कुल मिलाकर, नीलकेनि का 'पेपर ही न हो तो लीक क्या होगा' वाला तर्क परीक्षा सुधार की बहस को नई दिशा दे रहा है। अगर टास्क फोर्स की सिफारिशें सही तरीके से लागू हुईं तो भारत की परीक्षा प्रणाली दुनिया के लिए मिसाल बन सकती है। अब सबकी नजर टास्क फोर्स की अंतिम रिपोर्ट और सरकार के फैसलों पर है — क्योंकि करोड़ों छात्रों का भविष्य इसी से जुड़ा है।
- नीलकेनि का तर्क: तय प्रश्नपत्र चोरी करके बेचने का लालच पैदा करता है; आखिरी वक्त पर बना पेपर लीक नहीं हो सकता
- प्रस्ताव: विशाल प्रश्न बैंक से AI की मदद से परीक्षा के दिन ही प्रश्नपत्र तैयार हो
- सभी सार्वजनिक परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित (CBT) करने का सुझाव; 1.5 लाख केंद्रों का नेटवर्क बढ़ाना होगा
- NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद PM मोदी ने 26 जुलाई को टास्क फोर्स का गठन किया था
- टास्क फोर्स छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सुझाव भी मांग रहा है
- PM सुधारों को लागू करने के इच्छुक — सिफारिशों पर पायलट और नीतिगत फैसले बाकी
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

