UPI पर लगेगा चार्ज? NPCI ने MDR को दिवाली के बाद तक टाला, जानिए आपके खर्च पर क्या असर होगा

दुकान के काउंटर पर QR कोड स्कैन करके UPI पेमेंट करता ग्राहक

अगर आप रोज़ UPI से पेमेंट करते हैं तो ये खबर आपके लिए है — नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI पर लगने वाले प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के चार्ज को दिवाली के बाद तक टाल दिया है। यानी दिवाली और धनतेरस की खरीददारी पर इस नए चार्ज का कोई असर नहीं पड़ेगा। NPCI की UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को जारी बयान में कहा कि त्योहारों के सीजन को ध्यान में रखते हुए ये चार्ज दिवाली के तुरंत बाद लागू होगा, जिसकी तारीख अलग से घोषित की जाएगी।

प्रस्तावित फ्रेमवर्क के मुताबिक 2,000 रुपये से ऊपर के चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत MDR लगेगा, और एक ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 300 रुपये का कैप तय किया गया है। यानी 2,000 रुपये के पेमेंट पर करीब 8 रुपये और 10,000 रुपये के पेमेंट पर करीब 40 रुपये का चार्ज बनेगा। सरकार ने साफ किया है कि ये चार्ज दुकानदार या मर्चेंट को देना होगा, इसे ग्राहक पर किसी भी रूप में थोपा नहीं जा सकता।

राहत की बड़ी बातें भी हैं — 2,000 रुपये से कम के पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगेगा, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे, और जिन छोटे दुकानदारों को महीने में 1 लाख रुपये तक का UPI पेमेंट मिलता है वे भी इस दायरे से बाहर रहेंगे। यानी आपके मोहल्ले की छोटी दुकान और रेहड़ी-पटरी वालों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। चुनिंदा सार्वजनिक सेवाओं और बिल पेमेंट के लिए अलग व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

चार खास श्रेणियों के पेमेंट पर फ्लैट 5 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का चार्ज तय है — रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन। बाकी योग्य P2M ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत की दर लागू होगी। ये संरचना स्टीयरिंग कमेटी ने पहले ही तय कर दी थी और मूल रूप से इसे 15 अक्टूबर से लागू होना था, लेकिन त्योहारों के बीच व्यापारियों की चिंताओं के बाद NPCI ने इसे टाल दिया।

पीछे मुड़कर देखें तो UPI पेमेंट 2020 से मर्चेंट्स के लिए लगभग मुफ्त हैं — तब सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए MDR हटा दिया था। NPCI का तर्क है कि लंबे समय तक UPI इकोसिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए — इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, इनोवेशन और ग्राहक सेवा में निवेश के लिए — एक राजस्व मॉडल जरूरी है। वहीं व्यापारी संगठनों का कहना था कि त्योहारों के बीच चार्ज लागू करने से लागत बढ़ेगी, जिसके बाद NPCI ने इसे दिवाली के बाद तक टालने का फैसला किया।

आम ग्राहक के लिए सबसे जरूरी सवाल ये है — क्या UPI से पेमेंट करने पर हमें अतिरिक्त पैसे देने होंगे? जवाब है: नहीं। प्रस्तावित फ्रेमवर्क में MDR मर्चेंट को देना है, और सरकार ने स्पष्ट कहा है कि इसे ग्राहक पर नहीं थोपा जा सकता। यानी आपकी दिवाली की खरीददारी का बिल इस चार्ज से नहीं बढ़ेगा। बड़े मर्चेंट्स के लिए ये लागत उनकी ऑपरेटिंग लागत का हिस्सा बनेगी, लेकिन ग्राहक के लिए UPI पहले जैसा ही मुफ्त रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि UPI जैसे प्रतिस्पर्धी पेमेंट मार्केट में ये चार्ज बड़ी मूल्य-वृद्धि का कारण नहीं बनेगा, क्योंकि पुराने पेमेंट सिस्टम भी ऐसे चार्ज के बिना टिके रहे हैं। NPCI आने वाले हफ्तों में लागू करने की सटीक तारीख और दायरे की पूरी सूची जारी करेगा, इसलिए दुकानदारों को औपचारिक सर्कुलर का इंतज़ार करना चाहिए।

ये खबर उस दौर में आई है जब UPI रोज़ाना करोड़ों लेनदेन संभाल रहा है और त्योहारों में रिकॉर्ड वॉल्यूम की उम्मीद है। दिवाली 8 नवंबर को है और लागू करने की तारीख अलग से घोषित होगी। तब तक — ग्राहकों के लिए सब कुछ पहले जैसा ही चलता रहेगा।

मुख्य बातें:
  • NPCI ने 13 अक्टूबर को घोषणा की — प्रस्तावित UPI MDR अब दिवाली के तुरंत बाद लागू होगा; पहले की तारीख 15 अक्टूबर थी।
  • 2,000 रुपये से ऊपर के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR, अधिकतम 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन।
  • ग्राहकों को कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं — MDR सिर्फ मर्चेंट देगा; 2,000 से कम के पेमेंट और P2P ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त।
  • महीने में 1 लाख रुपये तक UPI लेने वाले छोटे दुकानदार दायरे से बाहर; रेलवे-टेलीकॉम-बीमा-ईंधन पर फ्लैट 5 रुपये।
  • 2020 से UPI मर्चेंट्स के लिए मुफ्त है; NPCI का तर्क — इकोसिस्टम की टिकाऊता के लिए राजस्व मॉडल जरूरी।
  • लागू करने की सटीक तारीख आने वाले हफ्तों में अलग से घोषित होगी।

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।