दिवाली से पहले रुला रही महंगाई: चना 1 महीने में 18% महंगा, दिल्ली-NCR में प्याज 80 रुपये तक

त्योहारी सीजन में भारतीय सब्जी बाजार में प्याज और चने के ढेर

त्योहारों के मौसम में आम घरों का रसोई बजट बिगड़ने लगा है। चने की कीमतों में महज एक महीने में करीब 18 फीसदी का उछाल आया है, और दिल्ली-NCR के कई इलाकों में अच्छी क्वालिटी के प्याज 80 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे हैं।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के 13 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक देश भर में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.15 रुपये प्रति किलो था। उसी तारीख को चना दाल 91.14 रुपये और बेसन 97.91 रुपये प्रति किलो के राष्ट्रीय औसत पर था। लेकिन ये राष्ट्रीय औसत हैं — दिल्ली-NCR जैसे बड़े शहरों में क्वालिटी वाले प्याज 80 रुपये तक पहुंच गए हैं, जो दिखाता है कि जगह, क्वालिटी और विक्रेता के हिसाब से दाम में कितना अंतर होता है।

प्याज की महंगाई की कहानी सबसे गंभीर है। एक बाजार विश्लेषण के अनुसार प्याज की कीमतें साल भर में लगभग 113 फीसदी बढ़कर करीब 53 रुपये किलो पर पहुंच गई हैं — 42 जरूरी खाद्य वस्तुओं में सबसे तेज बढ़ोतरी। इसकी बड़ी वजह महाराष्ट्र में खरीफ प्याज के उत्पादन में 5-7 फीसदी की गिरावट है।

चने के बाजार में भी आपूर्ति कसी हुई है। दिल्ली में राजस्थान मूल के देसी चने करीब 7,225-7,250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर थे। राहत की एक किरण यह है कि केंद्र सरकार के केंद्रीय पूल में करीब 19.5 लाख टन चने का भंडार है — अगर कीमतें बेकाबू हुईं तो इस स्टॉक को बाजार में उतारकर दाम ठंडे किए जा सकते हैं।

मांग का दबाव समझना भी जरूरी है। दिवाली के साथ ही शादी का सीजन शुरू होता है, जब चने, दाल और बेसन से बनी मिठाइयों और नमकीन की खपत बढ़ जाती है — और त्योहारी मांग के साथ कसी आपूर्ति कीमतों को ऊपर धकेलती है।

महंगाई का बड़ा चित्र भी चिंताजनक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के मुताबिक सितंबर में खुदरा महंगाई (CPI) बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई, जो अगस्त के 4.83 फीसदी से काफी ज्यादा है। खाद्य महंगाई 5.97 से बढ़कर 7.74 फीसदी हो गई। सबसे ज्यादा महंगाई वाली वस्तुओं में प्याज (108.09%), अदरक (62.85%), लहसुन (54.62%) और नींबू (36.41%) रहे।

इस बढ़ती महंगाई पर रिजर्व बैंक ने भी कड़ा रुख अपनाया है। RBI ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी करके इसे 5.50 फीसदी कर दिया — यह करीब चार साल में पहली दर वृद्धि है। साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया गया।

आपूर्ति की जड़ में मौसम भी है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घकालिक औसत से 13 फीसदी कम बारिश के साथ खत्म हुआ, जलाशयों का स्तर 72 फीसदी रहा जबकि पिछले साल 92 फीसदी था। खरीफ की कुल बुवाई पिछले साल से करीब 1 फीसदी कम रही और धान की बुवाई करीब 3 फीसदी घटी — यानी आने वाले महीनों में भी आपूर्ति दबाव बना रह सकता है।

सरकार ने चुनिंदा खुदरा केंद्रों के जरिए सस्ते प्याज की आपूर्ति शुरू की है, लेकिन अंतिम राहत नई खरीफ फसल की आमद से ही मिलेगी। बाजार के जानकारों के मुताबिक महाराष्ट्र और अन्य उत्पादक राज्यों से नई फसल कब, कितनी मात्रा में और किस क्वालिटी की आती है — यही तय करेगा कि प्याज और दालों के दाम कब नरम होंगे। तब तक आम उपभोक्ता के लिए सबसे समझदारी भरा रास्ता यही है कि थोक में जमाखोरी से बचें, सरकारी सस्ती दर वाली दुकानों का लाभ उठाएं और मौसमी सब्जियों की ओर रुख करें।

मुख्य बातें:
  • चना एक महीने में लगभग 18% महंगा; दिल्ली-NCR के कुछ इलाकों में अच्छे प्याज 80 रुपये किलो तक
  • सरकारी आंकड़ा: राष्ट्रीय औसत प्याज 53.15 रुपये, चना दाल 91.14 रुपये, बेसन 97.91 रुपये किलो (13 अक्टूबर)
  • प्याज साल भर में करीब 113% महंगा — महाराष्ट्र में खरीफ उत्पादन 5-7% घटा
  • सितंबर में खुदरा महंगाई 5.54%, खाद्य महंगाई 7.74% — RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया
  • सरकार के पास करीब 19.5 लाख टन चने का बफर स्टॉक — जरूरत पड़ी तो बाजार में उतारा जा सकता है
  • नई खरीफ फसल की आमद की टाइमिंग, मात्रा और क्वालिटी ही तय करेगी कि दाम कब नरम होंगे

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।