Blinkit-Instamart पर अब दिखेगा एक्सपायरी डेट: FSSAI का सख्त नियम, ऑनलाइन फूड पर बड़ी लगाम

ऑनलाइन किराना और खाना मंगवाने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। देश की खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था FSSAI ने क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियम लाने की घोषणा की है — अब Blinkit, Swiggy Instamart, Zepto, BigBasket और Amazon Now जैसी ऐप्स पर बिकने वाले हर फूड प्रोडक्ट की लिस्टिंग पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर साफ-साफ दिखाना होगा।
FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजित पुनहानी ने 13 अक्टूबर को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि ई-कॉमर्स अब नियामक का अगला बड़ा फोकस क्षेत्र है। उनका साफ कहना था कि अब प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह बनाया जाएगा।
दरअसल, आज की स्थिति यह है कि कई ऐप्स पर प्रोडक्ट की सिर्फ शेल्फ लाइफ बताई जाती है, लेकिन असली एक्सपायरी डेट या बैच नंबर ऑर्डर करने से पहले ग्राहक को नहीं दिखता। इसका मतलब है कि सामान आपके दरवाजे पर पहुंचने के बाद ही पता चलता है कि पैकेट कब बना था और उसकी मियाद कब खत्म हो रही है। प्रस्तावित नियम इस खामी को सीधे खत्म कर देंगे — खरीद से पहले ही हर जरूरी जानकारी स्क्रीन पर होगी।
नए नियमों का एक और अहम हिस्सा डार्क किचन और डार्क स्टोर से जुड़ा है। डार्क किचन यानी वे रसोईघर जो सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर के लिए खाना बनाते हैं और जिनका कोई रेस्तरां नहीं होता — इन्हें अब अपनी फोटो और असली पता बताना होगा। इसी तरह डार्क स्टोर में सामान रखने की स्थितियों पर सख्त जांच होगी, खासकर फ्रोजन फूड जैसे आइसक्रीम, फ्रोजन सब्जियों और पैकेज्ड मीट के भंडारण को लेकर।
इस घोषणा से पहले FSSAI ने पिछले कुछ महीनों में कार्रवाई काफी तेज कर दी थी। Blinkit, Swiggy Instamart, वॉलमार्ट की Flipkart और Amazon की भारत इकाई — सभी पर गलत लेबलिंग, प्रतिबंधित सामान बेचने और अवैध लाइसेंस जैसे उल्लंघनों पर नियामकीय कार्रवाई हुई। अप्रैल से सितंबर के बीच केंद्र और राज्य एजेंसियों ने लगभग 7 लाख निरीक्षण किए, और ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ मुकदमे 5-6 गुना बढ़ गए।
प्लेटफॉर्म्स की तरफ से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। Swiggy Instamart ने जुलाई में FSSAI की जांच के बाद कहा था कि वह चिह्नित लिस्टिंग की समीक्षा कर रहा है और अधिकारियों के संपर्क में है। Amazon ने कहा कि वह एक मार्केटप्लेस के रूप में काम करता है जहां स्वतंत्र विक्रेता सामान बेचते हैं, और नियमों का पालन न करने वाले प्रोडक्ट हटाए जाते हैं।
यह नियामकीय दबाव सिर्फ क्विक-कॉमर्स तक सीमित नहीं है। FSSAI सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल क्षेत्र पर भी कड़ी नजर रख रहा है, जहां वजन घटाने के अप्रमाणित दावों की जांच हो रही है। पेप्सिको, रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और मॉन्स्टर बेवरेज जैसी बड़ी कंपनियों ने नियामक के कदमों को कानूनी चुनौती दी और शुरुआती प्रक्रियात्मक राहत भी पाई — लेकिन पुनहानी ने भरोसा जताया कि मजबूत उपभोक्ता समर्थन के दम पर नियामक अंततः सफल होगा।
संदर्भ के लिए बता दें कि यह कदम करीब 80 अरब डॉलर के ऑनलाइन रिटेल उद्योग को प्रभावित करेगा, जिसमें कंसल्टेंसी फर्म Redseer के अनुमान के मुताबिक किराना सामान की हिस्सेदारी 51 फीसदी तक है। यानी हर दो में से एक ऑनलाइन खरीदारी किसी न किसी रूप में खाने-पीने के सामान से जुड़ी है — इसलिए पारदर्शिता का यह नियम करोड़ों उपभोक्ताओं को सीधे छुएगा।
आगे क्या होगा? बिज़नेस स्टैंडर्ड की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक नियम अभी मसौदे की अवस्था में हैं और इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है। उपभोक्ताओं के लिए सलाह यही है कि जब ये नियम लागू हों, तो ऑर्डर करते समय लिस्टिंग पर तारीखें जरूर जांचें — और अगर कोई प्लेटफॉर्म नियम का पालन न करे, तो FSSAI के पास शिकायत का रास्ता पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है।
- ऑनलाइन फूड लिस्टिंग पर मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर दिखाना अनिवार्य होगा
- गलत दावे करने वाले निर्माताओं के लिए अब प्लेटफॉर्म भी जवाबदेह — सिर्फ विक्रेता पर दोष नहीं मढ़ा जा सकेगा
- डार्क किचन की फोटो और पता बताना होगा, डार्क स्टोर में फ्रोजन सामान के भंडारण पर सख्त जांच
- अप्रैल से सितंबर के बीच लगभग 7 लाख निरीक्षण, ई-कॉमर्स कंपनियों पर मुकदमे 5-6 गुना बढ़े
- नियम अभी मसौदा चरण में हैं — चरणबद्ध तरीके से लागू होने की संभावना
- ग्राहकों को अब ऑर्डर से पहले प्रोडक्ट की असली एक्सपायरी जानने का अधिकार मिलेगा
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

