दिल्ली में आज SIR के खिलाफ बड़ा विरोध: हाईकोर्ट ने नहीं रोका, 23,000 पुलिसकर्मी तैनात

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेड के पास जमा भीड़

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार 15 अक्टूबर की शाम को सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि शुक्रवार 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत का यह फैसला प्रदर्शनकारियों के पक्ष में माना जा रहा है, क्योंकि दिल्ली पुलिस इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर रही थी। CJP ने पहले ही दिल्ली पुलिस को अल्टीमेटम दिया था कि 16 अक्टूबर तक अनुमति दी जाए, वरना पार्टी अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन करेगी।

यह पूरा विवाद मतदाता सूचियों की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर है। CJP समेत कई विपक्षी दल और संगठन आरोप लगा रहे हैं कि इस समीक्षा के नाम पर मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि समीक्षा एक नियमित और जरूरी प्रक्रिया है, और जिनके नाम हटे हैं उनके पास अपील का रास्ता खुला है।

गुरुवार को दिनभर राजधानी में तनाव का माहौल रहा। इंडिया गेट पर रातभर चले धरने के बाद दिल्ली पुलिस ने अंकिता भंडारी के माता-पिता और कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। इससे एक दिन पहले 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे CJP के नेताओं को पांच दिन की हिरासत में भेजा गया था। उसी दिन जंतर-मंतर ने तीन दशक बाद अधिकृत विरोध-स्थल का दर्जा भी खो दिया, जिससे विरोध के लिए जगह का सवाल और उलझ गया।

सुरक्षा के लिहाज से दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अभूतपूर्व बंदोबस्त किए हैं। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक करीब 23,000 पुलिसकर्मी राजधानी भर में तैनात किए गए हैं। भारतीय रेलवे ने शनिवार को नई दिल्ली के दो स्टेशनों पर आने वाली कई ट्रेनें रद्द कर दीं, जबकि दिल्ली मेट्रो ने 57 स्टेशनों को बंद करने की घोषणा की। इन प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रतिबंधों पर पुनर्विचार किया जाए और यह सुनिश्चित हो कि सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह ठप न हो।

SIR विवाद की जड़ में मतदाता सूचियों की वह राष्ट्रव्यापी समीक्षा है जो देश के अधिकतर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है। रिपोर्टों के अनुसार इस प्रक्रिया में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा नाम सूचियों से हटाए जा चुके हैं, और लाखों लोगों ने इन हटाए गए नामों के खिलाफ अपील दायर की है। आलोचकों का कहना है कि अपील की प्रक्रिया खासकर उन लोगों के लिए मुश्किल है जिनके पास पुराने सरकारी दस्तावेज नहीं हैं।

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की संयुक्त याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। राहुल गांधी ने CJP के नेताओं के समर्थन में भी बयान दिया है। दूसरी ओर सरकार और चुनाव आयोग का रुख है कि समीक्षा पारदर्शी तरीके से हो रही है और किसी भी वैध मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद अब सिर्फ मतदाता सूची की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह चुनावी प्रक्रिया में भरोसे के बड़े सवाल में बदल गया है। 13 करोड़ नामों का हटना एक बहुत बड़ा आंकड़ा है, और अपील प्रक्रिया की जटिलता को लेकर उठ रहे सवालों ने आम मतदाताओं में भी चिंता पैदा की है।

अब सबकी नजरें शुक्रवार 16 अक्टूबर के प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन के लिए प्रदर्शन को संभालना चुनौती होगी, तो प्रदर्शनकारियों के लिए यह एक बड़ी नैतिक जीत है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि SIR प्रक्रिया और अदालतों के फैसले इस गतिरोध को किस दिशा में ले जाते हैं।

मुख्य बातें:
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अक्टूबर के CJP विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार किया
  • CJP का दिल्ली पुलिस को अल्टीमेटम था: अनुमति दो, वरना शुक्रवार को प्रदर्शन होगा
  • राजधानी में 23,000 पुलिसकर्मी तैनात; 57 मेट्रो स्टेशन बंद, कई ट्रेनें रद्द
  • 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर ने 30 साल पुराना अधिकृत विरोध-स्थल का दर्जा खोया
  • SIR समीक्षा में अब तक 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए; सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।