भारत-कनाडा के बीच 70 अरब डॉलर का व्यापार लक्ष्य: ओटावा में CEPA का पांचवां दौर पूरा

भारत और कनाडा के झंडे, पृष्ठभूमि में कार्गो जहाज — व्यापार वार्ता का प्रतीक

भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) की वार्ता तेज हो गई है। दोनों देशों ने 5 से 9 अक्टूबर तक ओटावा में पांचवें दौर की बातचीत पूरी की और अब 2026 के अंत तक समझौता करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। यह उस द्विपक्षीय आर्थिक रिश्ते में महत्वपूर्ण पड़ाव है जो लंबे कूटनीतिक गतिरोध के बाद तेजी से पटरी पर लौटा है।

दोनों देशों ने 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 4.65 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंचाने की आकांक्षा जताई है। 2025 में यह 30.4 अरब कनाडाई डॉलर था — यानी लक्ष्य दोगुने से भी ज्यादा का है। कनाडा के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में सिर्फ वस्तुओं का व्यापार 13.6 अरब कनाडाई डॉलर रहा।

व्यापार की बारीकियों पर नजर डालें तो 2025 में कनाडा ने भारत को 3.9 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जिसमें सब्जियां, खनिज ईंधन-तेल और लकड़ी का गूदा प्रमुख थे। वहीं भारत से कनाडा ने 9.7 अरब डॉलर का आयात किया — जिसमें कीमती पत्थर-धातु, मशीनरी और दवाइयां सबसे आगे थीं। सेवाओं के मोर्चे पर कनाडा का सेवा निर्यात 15.2 अरब डॉलर रहा, जिसमें शिक्षा से जुड़ी यात्रा सबसे बड़ा हिस्सा था।

इस वार्ता की पृष्ठभूमि भी जानना जरूरी है। मार्च 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की नई दिल्ली में हुई मुलाकात में CEPA वार्ता का औपचारिक पुनरुद्धार हुआ और वार्ता के नियम-संदर्भ (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) तय किए गए। चौथा दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में हुआ था, और उसके बाद ही अक्टूबर में ओटावा का पांचवां दौर हुआ।

वार्ता के केंद्र में ऊर्जा, क्रिटिकल खनिज, एयरोस्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र हैं। कनाडा के लिए यह समझौता अमेरिका पर भारी निर्भरता से अपने निर्यात आधार को विविध बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

व्यापार वार्ता के साथ-साथ कनाडा अपना सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत भेज रहा है — लगभग 300 कारोबारी प्रतिनिधियों वाला यह मिशन 30 से ज्यादा सालों में भारत के लिए कनाडा का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल है। इसका नेतृत्व कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू कर रहे हैं, और एयरोस्पेस, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, कृषि-खाद्य और वानिकी जैसे क्षेत्रों पर फोकस है।

अगर यह समझौता होता है तो दोनों तरफ के उपभोक्ताओं और उद्योगों पर असर पड़ेगा। बाजार पहुंच बढ़ने और शुल्कों में कटौती से भारतीय वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और खाद्य उत्पाद कनाडा में सस्ते हो सकते हैं, जबकि कनाडाई ऊर्जा और खनिज कंपनियों को 1.4 अरब से ज्यादा आबादी वाले भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। एयरोस्पेस और तकनीकी कंपनियों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।

हालांकि अभी कोई समझौता हस्ताक्षरित नहीं हुआ है — ये सिर्फ वार्ताएं हैं। दोनों सरकारों ने 2026 के अंत तक बातचीत पूरी करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन अगले दौर की तारीख की घोषणा नहीं हुई है और बकाया मतभेदों का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है। दोनों देशों के उद्योग जगत के जानकार अब इस बात पर नजर रखे हैं कि मंत्रिस्तरीय गति आने वाले हफ्तों में अंतिम ढांचे में बदलती है या नहीं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कनाडा का व्यापार प्रतिनिधिमंडल भारत में किन व्यावहारिक साझेदारियों की नींव रखता है। विशेषज्ञों के मुताबिक 2026 के अंत की समयसीमा महत्वाकांक्षी है, लेकिन दोनों पक्षों की गति को देखते हुए यह असंभव नहीं। भारत के लिए यह समझौता वैश्विक व्यापार में अपनी बढ़ती भूमिका का एक और प्रमाण होगा — और कनाडा के लिए एशिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था से जुड़ने का सुनहरा मौका।

मुख्य बातें:
  • पांचवां दौर ओटावा में 5-9 अक्टूबर को; दोनों देश 2026 के अंत तक समझौते का लक्ष्य रखे हुए हैं
  • 2030 तक सालाना 70 अरब कनाडाई डॉलर (~4.65 लाख करोड़ रुपये) व्यापार का लक्ष्य — 2025 में यह 30.4 अरब था
  • ऊर्जा, क्रिटिकल खनिज, एयरोस्पेस, AI और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग प्राथमिकता वाले क्षेत्र
  • मार्च 2026 में मोदी-कार्नी मुलाकात में वार्ता का औपचारिक पुनरुद्धार, चौथा दौर नई दिल्ली में हुआ था
  • कनाडा का 30+ सालों में सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल — लगभग 300 कारोबारी प्रतिनिधि
  • समझौता अभी वार्ता के चरण में है — कुछ भी हस्ताक्षरित नहीं हुआ, अगले दौर की तारीख तय नहीं

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।