गगनयान मिशन की बड़ी तैयारी: ISRO ने पूरे किए क्रू मॉड्यूल सेपरेशन टेस्ट

धरती के ऊपर क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल का अलगाव

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन की तैयारी में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। ISRO ने क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) के सेपरेशन टेस्टों की श्रृंखला सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह जानकारी 17 अक्टूबर को सामने आई, और इससे पहली मानव रहित उड़ान G1 की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा है, जो 2026 में लक्षित है।

गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल दो हिस्सों से बना है — क्रू मॉड्यूल, जिसमें अंतरिक्ष यात्री (या मानव रहित उड़ानों में सिस्टम और हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट व्योममित्रा) सवार होंगे, और सर्विस मॉड्यूल, जो बिजली, प्रणोदन और अन्य सहायक कार्य देता है। दोनों मॉड्यूल एक सेपरेशन सिस्टम से जुड़े होते हैं और अम्बिलिकल कनेक्शनों से बिजली व तरल पदार्थ की आपूर्ति होती है।

उड़ान के दौरान ये दोनों मॉड्यूल लॉन्च से लेकर कक्षीय चरण के पूरा होने तक एक इकाई की तरह काम करते हैं। लेकिन धरती के वायुमंडल में प्रवेश करने से पहले क्रू मॉड्यूल को सर्विस मॉड्यूल से अलग होना पड़ता है। यह अलगाव पायरोटेक्निक उपकरणों और जेटिसनिंग सिस्टम की मदद से कई सटीक क्रमबद्ध घटनाओं से होता है।

इस पूरे डिजाइन को परखने के लिए ISRO ने तिरुवनंतपुरम के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में टेस्ट सेटअप बनाया था। इस सेटअप में जुड़े हुए क्रू मॉड्यूल-सर्विस मॉड्यूल का सिमुलेशन किया गया और व्यापक इंस्ट्रुमेंटेशन लगाकर सेपरेशन की प्रक्रिया का आकलन किया गया।

परीक्षणों में दोनों मॉड्यूलों के अलगाव का पूरा दृश्य दोहराया गया, जिसमें उनके बीच के कई अम्बिलिकल कनेक्शनों को काटना भी शामिल था। ISRO के अनुसार, इन टेस्टों ने न केवल सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की पर्याप्तता को सिद्ध किया, बल्कि क्रू मॉड्यूल के कई अहम उप-प्रणालियों की झटका-सहनशीलता को भी प्रदर्शित किया।

इन उप-प्रणालियों में एवियोनिक्स, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, पिछले और शंकु आकार के हीट शील्डों की थर्मल प्रोटेक्शन व्यवस्था, क्रू मॉड्यूल डिप्लॉयेबल अम्बिलिकल शील्ड और क्रू मॉड्यूल अपराइटिंग सिस्टम व थर्मल-ह्यूमिडिटी कंट्रोल से जुड़े पायरोटेक्निक उपकरण शामिल हैं।

गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका लक्ष्य भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा में भेजकर सुरक्षित धरती पर वापस लाना है। इसके लिए मानव-रेटेड लॉन्च वाहन, क्रू सुरक्षा, जीवन रक्षा प्रणाली, नेविगेशन और रिकवरी जैसे अहम क्षेत्रों पर लगातार काम चल रहा है। क्रू मॉड्यूल-सर्विस मॉड्यूल सेपरेशन टेस्ट इसी लंबी तैयारी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो मिशन की सुरक्षा को और पुख्ता करता है।

इस सफलता से G1 मिशन में लागू किए गए सेपरेशन सिस्टम के सही काम करने को लेकर ISRO का विश्वास बढ़ा है। मानव रहित उड़ान से पहले सभी अहम प्रणालियों की जांच पूरी करना जरूरी है, ताकि बाद में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित कक्षा में भेजा जा सके।

कुल मिलाकर, यह परीक्षण गगनयान की उड़ान प्रोफाइल के एक बेहद नाजुक चरण को मान्य करता है। विश्वसनीय सेपरेशन इसलिए जरूरी है क्योंकि वायुमंडल में सुरक्षित वापसी से पहले क्रू मॉड्यूल का सर्विस मॉड्यूल से साफ-सुथरा अलगाव अनिवार्य है। भारत अब मानव अंतरिक्ष उड़ान के सपने के एक कदम और करीब पहुंच गया है।

मुख्य बातें:
  • ISRO ने गगनयान के सेपरेशन टेस्ट पूरे किए
  • तिरुवनंतपुरम के VSSC में हुआ परीक्षण
  • पहली मानव रहित उड़ान G1 की तैयारी में बड़ा कदम
  • सेपरेशन सिस्टम की डिजाइन सही साबित हुई
  • क्रू मॉड्यूल के अहम सिस्टम झटके झेलने में सक्षम
  • वायुमंडल में प्रवेश से पहले मॉड्यूल अलग होते हैं

यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।