सरसों के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर: मंडियों में ₹7,700 तक, MSP से ₹1,700 ज्यादा

सरसों किसानों के लिए यह खबर खुशियों वाली है। देशभर की मंडियों में सरसों के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। 17 अक्टूबर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत में सरसों का औसत मंडी भाव ₹7,826 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। अक्टूबर 2026 का मासिक औसत भाव ₹7,610-7,692 प्रति क्विंटल के आसपास है, जो अब तक का सबसे ऊंचा अक्टूबर औसत है — पिछले साल से करीब 19 प्रतिशत ज्यादा।
हरियाणा में स्थिति सबसे अच्छी है। अक्टूबर 2026 में हरियाणा का औसत भाव ₹8,003 प्रति क्विंटल रहा, जो पिछले साल से लगभग 20 प्रतिशत अधिक है। शाहाबाद मंडी में सरसों का भाव ₹7,700 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जो मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से करीब ₹1,750 ज्यादा है। अदमपुर मंडी में भी भाव ₹7,109 तक दर्ज हुआ, जहां आवक बहुत कम थी।
अभी मंडियों में आ रही ज्यादातर फसल पिछले सीजन की है। पिछले साल की MSP ₹5,950 प्रति क्विंटल थी, जबकि मौजूदा मंडी भाव ₹6,500 से ₹7,000 के बीच चल रहा है। यानी किसानों को MSP से ₹600 से ₹1,100 तक ज्यादा मिल रहा है। उत्पादन लागत करीब ₹3,011 प्रति क्विंटल आंकी गई है — ऐसे में किसानों को लागत से दोगुने से भी ज्यादा का मुनाफा हो रहा है, जो हाल के सालों का सबसे अच्छा रिटर्न है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सरसों की नई MSP ₹6,200 प्रति क्विंटल तय की है — पुरानी MSP से ₹250 ज्यादा। उत्पादन लागत ₹3,210 प्रति क्विंटल आंकी गई है, यानी किसानों को लागत पर 93 प्रतिशत का रिटर्न मिलेगा। यह किसानों के लिए बड़ी सुरक्षा है, चाहे बाजार भाव उतार-चढ़ाव भी दिखाए।
हालांकि सभी मंडियों में स्थिति एक जैसी नहीं है। मध्य प्रदेश की आगर, अशोकनगर, गुना और मुरैना मंडियों में भारी आवक के कारण भाव दबाव में हैं और न्यूनतम भाव ₹4,300 से ₹4,800 के बीच है — जो MSP से नीचे है। विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन किसानों के पास भंडारण की सुविधा है, वे भारी आवक वाली मंडियों में अभी बेचने की बजाय कुछ समय रुक सकते हैं।
जानकारों के मुताबिक, अच्छी गुणवत्ता वाली सरसों रखने वाले किसान हरियाणा जैसी कम आवक वाली मंडियों में बेचने का विचार कर सकते हैं, जहां भाव MSP से काफी ऊपर हैं। जिन मंडियों में आवक कम है, वहां आने वाले दिनों में भाव और मजबूत हो सकते हैं, इसलिए कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।
इस बीच, इस साल रबी सीजन में सरसों और रेपसीड की बुवाई पिछले साल की तुलना में तेजी से आगे बढ़ी है। तिल, कुसुम जैसे तिलहनी फसलों की बुवाई भी बढ़ी है। फिलहाल सरसों किसानों के लिए सबसे मुनाफेवाली तिलहनी फसल बनी हुई है — कई जिलों में बुवाई अभी चल रही है, तो कुछ में फसल पहली सिंचाई और खाद के चरण तक पहुंच गई है।
कुल मिलाकर, पुराना स्टॉक बेचने का यह अच्छा समय है — खासकर कम आवक वाली मंडियों में। अगर आवक नियंत्रित रहती है और तेल मिलें सक्रिय खरीदारी जारी रखती हैं, तो सरसों के भाव की यह मजबूती बनी रह सकती है। नई MSP ₹6,200 भी किसानों की जेब की सुरक्षा करती है।
- सरसों के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर — मंडियों में ₹7,700 तक
- पुराने स्टॉक पर MSP से ₹1,100-1,700 ज्यादा मिल रहा
- अक्टूबर का औसत भाव अब तक का सबसे ज्यादा
- RMS 2026-27 के लिए नई MSP ₹6,200 प्रति क्विंटल
- मध्य प्रदेश में भारी आवक से भाव MSP से नीचे
- कम आवक वाली मंडियों में बेचना बेहतर — सलाह
यह सारांश मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति बदल सकती है; ताज़ा जानकारी के लिए आधिकारिक सूत्रों से पुष्टि करें।

